Tiwari Maternity Center & Nursing Home and IVF Center Haldwani : जानिए क्या होता है IVF और कैसे की जाती है IVF प्रक्रिया
मेडिकल क्षेत्र में विज्ञान ने बहुत विकास किया है, परिणामस्वरूप आज हम बहुत सी तकनीकों का प्रयोग करके अपने जीवन की विभिन्न कमियों को पूरा कर सकते हैं। IVF ट्रीटमेंट उन्ही तकनीकी विकासों में से एक है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर IVF ट्रीटमेंट होता क्या है और किस प्रकार यह आपके माँ बनने में सहायक हो सकता है? इस लेख की सहायता से हम आपको बतायेंगे की IVF क्या है. यह प्रक्रिया कैसे होते है और किन कारणों से इनफर्टिलिटी होती है?
IVF क्या होता है? इन विट्रो फर्टिलाइजेशन ट्रीटमेंट को IVF ट्रीटमेंट कहा जाता है। पहले इसे “टेस्ट-ट्यूब बेबी” के नाम से जाना जाता था। इस प्रक्रिया का प्रयोग पहली बार 1978 में इंग्लैंड में किया गया था। आईवीएफ ट्रीटमेंट में प्रयोगशाला में कुछ नियंत्रित परिस्थितियों में महिला के एग्स और पुरुष के स्पर्म को मिलाया जाता है। जब संयोजन से भ्रूण बन जाता है तब उसे वापस महिला के गर्भाशय में रख दिया जाता है। हालाँकि आईवीएफ एक जटिल और महंगी प्रक्रिया है, किन्तु यह प्रक्रिया उन दम्पतियों के लिए बहुत सहायक होती है जो बहुत समय से गर्भधारण की तैयारी कर रहे हैं या किसी कारणवश अन्य फर्टिलिटी ट्रीटमेंट असफल हो गए हैं। आइये जानते हैं IVF प्रक्रिया क्यों, कैसे और कितने चरणों में होती हैं?
IVF प्रक्रिया क्यों की जाती है? यदि आप निःसन्तानता से जूझ रहे हैं तो आप अपने डॉक्टर से विचार विमर्श करके, किसी भी फर्टिलिटी इलाज को चुन सकते हैं। यदि आपका डॉक्टर आपको IVF कराने की सलाह देता है तो उसके लिए निम्न कारण हो सकते हैं:
- स्पर्म कम होने की स्थति में
- PCOD जैसी स्थितियों के कारण ओव्यूलेशन में समस्या
- फैलोपियन ट्यूब के साथ समस्याएं
- यदि दम्पति में से किसी ने नसबंदी कराई है
- एंडोमेट्रोसिस
- अन्य फर्टिलिटी इलाजों के असफल हो जाने पर
इसके अलावा IVF प्रक्रिया के लिए आप डोनर स्पर्म या डोनर एग का प्रयोग भी कर सकते हैं। इस प्रकार की प्रक्रिया उन दम्पतियों के लिए लाभकारी होती है जो किसी प्रकार के गंभीर आनुवंशिक विकार से पीड़ित हैं और अपने बच्चो में उस विकार को नहीं चाहते हैं।
साथ ही यदि कोई महिला या पुरुष कम आयु में कैंसर से पीड़ित हो जाते हैं, उस स्थिति में भी वे अपने स्वस्थ अंडे या शुक्राणु को IVF की सहायता से भविष्य के लिए बचा सकते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी का प्रयोग किया जाता है जो प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती है। कैंसर के इलाज के बाद इन एग्स या स्पर्म को IVF प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
हम यहाँ आपको सलाह देना चाहेंगे कि किसी भी प्रकार की प्रक्रिया का प्रयोग करने से पहले IVF डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। IVF प्रक्रिया किस प्रकार की जाती है? IVF प्रक्रिया करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें कि क्या आप IVF के लिए सही कैंडिडेट हैं या नहीं। डॉक्टर के निर्देशानुसार ही IVF कराना चाहिए। यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है जिनमें शामिल हैं – ओवेरियन स्टुमिलेशन, महिला की ओवरी से एग निकालना, पुरुष से स्पर्म प्राप्त करना, फर्टिलाइजेशन और महिला के गर्भ में भ्रूण स्थानांतरण। आईवीएफ के एक साइकिल में लगभग दो से तीन सप्ताह लग सकते हैं, और एक से अधिक साइकिल (IVF Cycle) की आवश्यकता हो सकती है।1. ओवेरियन स्टुमिलेशन- यदि आप आईवीएफ के दौरान अपने खुद के एग का उपयोग कर रहे हैं, तो साइकिल (IVF Cycle) की शुरुआत में आपकी ओवरी को कई अंडे बनाने के लिए स्टुमिलेट यानि कि उत्तेजित किया जाता है, इसके लिए आपका डॉक्टर सिंथेटिक हार्मोन के साथ इलाज शुरू करेगा। एक से अधिक एग की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि कुछ अंडे निषेचन (फर्टिलाइजेशन) के बाद सामान्य रूप से निषेचित या विकसित नहीं होते हैं।
इस प्रक्रिया में आपका डॉक्टर आपको बहुत सारी दवाइयाँ दे सकता है। जिसके लिए आपका डॉक्टर कई टेस्ट कर सकता है कि कौन सी दवाओं का उपयोग करना है और कब उनका उपयोग करना है। आमतौर पर, एग देने के लिए तैयार होने से पहले आपको एक से दो सप्ताह के ओवेरियन स्टुमिलेशन की आवश्यकता होगी। यह पता करने के लिए कि कब आपके एग्स लिए जा सकते हैं उसके लिए आपका डॉक्टर अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट इत्यादि के लिए कह सकता है।
2. ओवरी से एग निकालना- ओवरी से एग निकालने की प्रक्रिया महिला के ओवुलेशन प्रक्रिया के सही 34 से 36 घंटे बाद की जाती है। यह प्रक्रिया सामान्यतौर पर डॉक्टर के ऑफिस या क्लिनिक में की जा सकती है। इस दौरान आप बेहोश रहेंगे, और आपका ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड किया जायेगा जिसकी सहायता से आपकी वजाइना में एक पतली सुई डालकर एग्स को निकला जायेगा।
यदि ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड के माध्यम से ओवेरी सही से दिखाई नहीं देती है तो सुई का मार्गदर्शन करने के लिए पेट के अल्ट्रासाउंड का उपयोग किया जा सकता है। एग्स को सुई की सहायता से फॉलिकल्स से अलग कर दिया जाता है, और एग्स को निकल लिया जाता है। परिपक्व अंडे को एक पोषक तरल में रखा जाता है और ऊष्मायन किया जाता है। अंडे जो स्वस्थ और परिपक्व दिखाई देते हैं उन्हें भ्रूण बनाने के प्रयास में स्पर्म के साथ मिलाया जाएगा। हालांकि, सभी अंडों को सफलतापूर्वक फर्टिलाइज़ नहीं किया जा सकता है।3. स्पर्म लेना- यदि आपके पार्टनर का स्पर्म प्रयोग किया जा रहा है, यह प्रक्रिया आपके डॉक्टर के ऑफिस में या क्लिनिक में की जा सकती है। इसके लिए मस्टरबेशन की सहायता से डॉक्टर को IVF प्रक्रिया (IVF in Hindi) के लिए स्पर्म दिया जाता है। इसके अलावा टेस्टिक्युलर एस्पिरेशन (testicular aspiration) प्रक्रिया की सहायता से भी स्पर्म दिया जा सकता है। स्पर्म देने के बाद डॉक्टर लेब में स्पर्म को स्पर्म फ्लूड से अलग करेगा।
4. फर्टिलाइजेशन- फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया सामान्यतः दो तरीकों का उपयोग करके की जा सकती है:
5. गर्भ में भ्रूण स्थानांतरण- भ्रूण स्थानांतरण आपके डॉक्टर के ऑफिस या क्लिनिक में किया जाता है और आमतौर पर एग लेने के दो से पांच दिन बाद होता है। आपको एक हल्का पैन रिलीवर दिया जा सकता है। प्रक्रिया आमतौर पर दर्द रहित होती है, हालांकि आप थोड़ी ऐंठन का अनुभव कर सकते हैं। इसके बाद डॉक्टर आपकी योनि में, आपके सर्विक्स के माध्यम से और आपके गर्भाशय में एक लंबी, पतली, लचीली ट्यूब को डालेगा, जिसे केथेटर कहते हैं। केथेटर में एक या एक से अधिक भ्रूड को इसके माध्यम से आपके गर्भाशय में रखा जाता है।
Comments
Post a Comment