Tiwari Maternity Center & Nursing Home With IVF Center Haldwani ( 074568 23494) : अब 'IVF' की मदद से करें अपना अधूरा परिवार पूरा

आई वी एफ एक  प्रजनन उपचार यानि फर्टिलिटी ट्रीटमेंट है जो कि उन लोगों के लिए बना हैं जो बच्चा पैदा करने में असमर्थ होते है। इस प्रक्रिया से बाँझ दम्पत्तियों का उपचार किया जाता हैं। आई वी एफ के द्वारा काफी निःसंतान दम्पत्तियों को अपनी संतान होने का सुख मिला है।।

गर्भधारण प्रक्रिया में क्या होता है - इस प्रक्रिया में स्त्री के अंडे (एग) और पुरुष के शुक्राणु (स्पर्म) की आवश्यकता होती है। यह दोनों मिलकर शिशु उत्पादन की शुरूआती स्थिति का निर्माण करते हैं जिसे भ्रूण (एम्ब्र्यो) कहा जाता है। यदि स्त्री के अंडे, पुरुष के शुक्राणु या दोनों में ही कोई परेशानी होती है तो यह बाँझपन माना जाता है। साथ ही गर्भधारण नहीं हो पाता है। जिसका तात्पर्य है कि महिला साथी प्राकृतिक रूप से गर्भवती नहीं हो सकती। यह वो स्थिति है जब बाँझपन के इलाज की आवश्यकता होती है और आई वी एफ तब सामने आता है।

जब कोई विवाहित दंपत्ति पिछले 6 महीनों से लगातार असुरक्षित यौन क्रिया करने के बाद भी गर्भधारण करने में असफल होता है तो स्त्री के अंडे या पुरुष के शुक्राणु में कोई समस्या हो सकती है। यदि दोनों में ही कुछ दिक्कतें हो तो इस समस्या को युगल इनफर्टिलिटी (Couple Infertility) कहा जाता है। कई ऐसी स्थिति भी सामाने आई है, जिसमें युगल काफ़ी साल की कोशिशों के बाद प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में सफल रहें लेकिन यह एक दुलर्भ स्थिति है।

आई वी एफ क्या है  - इसमें स्त्री के अंडे और पुरुष शुक्राणु को शरीर के बाहर फर्टीलाइज़ किया जाता है। 'इन-विट्रो' दर्शाता है 'इन-ग्लास' जिसका अर्थ है ग्लास के अंदर। फर्टीलाइज़ेशन प्रक्रिया लैब के अंदर एक ग्लास पेट्री डिश में की जाती है। इस भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है ताकि वह बड़ा हो और शिशु का अकार ले।

आई वी एफ प्रकिया में क्या होता है? 

इस प्रक्रिया में महिला और पुरुष की जाँच की जाती हैं, उसके बाद परिणाम के अनुसार प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं।

पुरुष के सीमेन को लैब में साफ़ किया जाता है। फिर सक्रिय (अच्छे) और असक्रिय (बेकार) शुक्राणुओं को अलग किया जाता हैं।

महिला के शरीर में से इंजेक्शन के ज़रिए अंडे को बाहर निकालकर फ्रीज किया जाता है।

फिर लैब में पेट्री-डिश में अंडे के ऊपर सक्रिय शुक्राणु को रखा जाता है और प्राकृतिक रूप से प्रजनन के लिए छोड़ दिया जाता है।

प्रजनन के तीसरे दिन तक भ्रूण तैयार हो जाता है।

कैथिटर (Catheter) जो एक विशेष लचकदार नली की तरह दिखता है, उसकी मदद से महिला के गर्भाशय में ट्रासंफर किया जाता है।

कई बार भ्रूण को 5 दिन तक की निगरानी के बाद महिला के गर्भाशय में रखा जाता है।

5 दिन वाले भ्रूण में प्रेगन्नसी की सफलता दर अधिक बढ़ जाती है।

आई वी एफ की ज़रूरत कब हो सकती है?

पुरुष प्रजनन क्षमता - यह एक समस्या है जो काफी पुरुषों में पाई जाती है। पुरुष फर्टिलिटी उपचार, शुक्राणुओं की कमी होने पर, शुक्राणुओं की गति, शुक्राणुओं के आकार, सीमेन में खराब गुणवत्ता वाले शुक्राणु या वीर्यपात करने में अक्षमता इन सब के लिए मददगार है। आई वी एफ में केवल एक स्वस्थ शुक्राणु की आवश्यकता होती है जो कि अंडे को निषेचित कर सकें।

काफी महिलाओं में ओव्यूलेशन की समस्या होती है जिसकी वजह से वह अनियमित पीरियड्स, बहुत दर्दनाक पीरियड्स, पीरियड्स में अत्यंत रक्त बहना, या फिर पीरियड्स ना आना, ऐसी कठिनाइयों का सामना करती हैं। यह सब उनकी प्रजनन शक्ति को प्रभावित करती हैं। फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज या गर्भाशय में समस्या बाँझपन के सामान्य कारणों में से है। आई वी एफ प्रक्रिया में अधिक अंडों के विकास के लिए अंडाशय में इंजेक्शन लगाए जाते है।

आई वी एफ से उन दम्पत्तियों को आशा मिली है जो गर्भधारण नहीं कर पा रहे हैं। कुछ दम्पत्तियों को मामूली परेशानियों के कारण गर्भधारण करने में दिक्कत होती है जबकि कुछ को बड़ी दिक्कतों के कारणों की वजह से इस समस्या से जूझना पड़ता है। आई वी एफ के ज़रिये उन सभी दम्पातिओं का औलाद का सुख मिल सकता है।



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